पंजाब में हरियाणा के भरोसे जीत की भाजपा की कोशिश प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी संभाल रहे कमान
पंजाब में हरियाणा के भरोसे जीत की भाजपा की कोशिश प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी संभाल रहे कमान

Satya Khabar,Panchkula
भाजपा ने पंजाब में सवा साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। इस चुनाव में बीजेपी हरियाणा की नीतियों और हरियाणा की मुख्यमंत्री की कार्यशैली के भरोसे अब तक की पंजाब की सबसे बड़ी जीत दर्ज करने का प्रयास कर रही है। किसान आंदोलन के समय भाजपा की पंजाब के किसानों से कुछ दूरी बनी थी, जिसे खत्म करने का काम अब हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी अपनी नीतियों और अपने कार्यों से कर रहे हैं।
पिछले दिनों जब पंजाब और हरियाणा में बाढ़ का असर देखने को मिला तो पंजाब में जहां बाढ़ तबाही मचा रही थी वहीं हरियाणा में इसका असर काफी कम था। सीएम सैनी की योजनाओं, किसानों के लिए उठाए गए कदमों और उनकी कार्यशैली का असर तब हरियाणा से बाहर पंजाब में भी दिखाई देने लगा। सीमा से लगे कई गांवों में सिख परिवार यह कहते सुने गए कि “हमें नायब सिंह सैनी हरियाणा में मिला लें, क्योंकि किसानों के लिए हरियाणा की योजनाएं पंजाब से कहीं बेहतर हैं।” यह प्रतिक्रिया न सिर्फ सैनी के प्रति पंजाब के किसानों के भरोसे को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि किसान-समुदाय के मुद्दों पर उनका साइलेंट काम लोगों के दिलों तक पहुंच रहा है।
केंद्र सरकार के सिखों और पंजाब के लिए काम
केंद्र सरकार ने बीते सालों में पीएम मोदी के नेतृत्व में सिख समुदाय के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस दौरान 9 नवंबर 2019 को करतारपुर कॉरिडोर के इंटीग्रेटेड चेक-पोस्ट का शुभारंभ किया गया। देशभर के प्रमुख गुरुद्वारों और तख़्तों में प्रधानमंत्री की निरंतर उपस्थिति दर्ज की गई। इन पहलों ने न केवल धार्मिक आस्था को नई मजबूती दी, बल्कि सीमावर्ती पवित्र स्थलों तक पहुंच को सरल बनाकर श्रद्धालुओं को बड़ा लाभ दिया। लेकिन इसके बाद किसान आंदोलन से भाजपा और किसानों के बीच दूरी बनने लगी जिसे अब साइलेंट मोड में काम करते हुए नायब सैनी काम करने का काम कर रहे हैं।
हरियाणा सरकार द्वारा सिखों को महत्व
प्रधानमंत्री की कार्यशैली से प्रेरणा लेते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी सिख समुदाय से जुड़ाव बढ़ाने और किसान आंदोलन के बाद बनी दूरी को बिना शोर-शराबे के, शांति और सम्मान के साथ कम करने का रास्ता चुना। उनके प्रयास राजनीतिक कम और मानवीय अधिक नजर आ रहे हैं। इसीलिए समुदाय में यह संदेश गया कि सरकार टकराव नहीं, भरोसा बनाना चाहती है। यही कारण है कि अक्टूबर 2025 में नायब सैनी को ग्लोबल पंजाब एसोसिएशन द्वारा “शेरे पंजाब महाराजा रणजीत सिंह अवार्ड” से नवाजा गया, जहां उन्होंने गुरु तेग बहादुर के बलिदान पर आधारित ‘तिलक जांजू का राक्खा’ पुस्तक का विमोचन भी किया।
सिख परंपराओं के प्रति सम्मान
सीएम सैनी की सरल पगड़ी धारण शैली, गुरुद्वारों में नियमित उपस्थितियां और रीति-रिवाजों के प्रति सम्मान ने सिख समुदाय में उनके प्रति निकटता बढ़ाई है। पंजाब के उनके दौरों ने यह भाव पैदा किया कि वे केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव पर काम कर रहे हैं।
सिख विरासत के संरक्षण के लिए ठोस कदम
25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर विश्वस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन।
गुरु तेग बहादुर जी पर स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी करवाना।
एचएसजीपीसी के नव निर्वाचित सदस्यों से मुलाकात कर पारदर्शिता और सेवा-भाव से कार्य करने हेतु सहयोग का आश्वासन।
यमुनानगर कालेसर में फॉरेस्ट ब्लॉक व कृषि महाविद्यालय को गुरु तेग बहादुर के नाम समर्पित करना और 350 पौधों का रोपण।
पूरे प्रदेश में चार नगर कीर्तन यात्राओं की शुरुआत, जिसमें गुरुद्वारे, एचएसजीपीसी और प्रशासन मिलकर कार्य कर रहे हैं।
CM सैनी का दृष्टिकोण
नायब सिंह सैनी सिख समुदाय को केवल ‘अल्पसंख्यक’ नहीं, बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत हिस्सा मानते हैं। उनकी यही सोच सिख विरासत को स्थायी रूप से संरक्षित कर रही है और हरियाणा-सिख संबंधों को नई मजबूती दे रही है।
हरियाणा की लाडो लक्ष्मी योजना का असर
प्रदेश सरकार द्वारा दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना की दूसरी किसने जारी कर दी गई है। इस योजना का असर भी पंजाब में साफ दिखाई देने लगा है। पंजाब की महिलाएं भी चाहती हैं कि उन्हें भी हरियाणा की तर्ज पर ₹2100 प्रति महीना मिलने लगे। हरियाणा की योजना से पंजाब सरकार की नींद हराम है और वह आज स्थिति में नहीं है कि इस योजना को धरातल पर उतार सके। ऐसे में भाजपा आने वाले चुनाव में हरियाणा की तर्ज पर पंजाब की महिलाओं को भी लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ देने का वादा कर सकती है।